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क्या समूह में शिकायत करना बेहतर है?
हाँ, समूह में शिकायत करना (Group Filing) व्यक्तिगत शिकायत की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और प्रभावी माना जाता है।
स्रोतों के अनुसार, इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- कानूनी खर्च में भारी कमी: समूह में मिलकर कानूनी कार्रवाई करने से आपके व्यक्तिगत कानूनी खर्च में 80% तक की कमी आ सकती है।
- अधिक प्रभाव और दबाव: सामूहिक शिकायतों का कानूनी और प्रशासनिक वजन व्यक्तिगत शिकायतों की तुलना में बहुत अधिक होता है। इससे बिल्डर पर बातचीत की मेज पर आने और समझौता करने का कहीं अधिक दबाव पड़ता है।
- मीडिया का ध्यान: खरीदारों का एक बड़ा समूह मीडिया और सोशल मीडिया का ध्यान आसानी से आकर्षित करता है, जिससे बिल्डर की सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ती है।
- समान समस्याओं का समाधान: चूंकि एक ही प्रोजेक्ट (जैसे सुषमा वैलेंसिया, ग्रांडे एनएक्सटी या होमवर्क) के सभी खरीदारों की समस्याएं एक जैसी होती हैं, इसलिए समूह में लड़ना आसान होता है।
समूह कैसे खोजें या बनाएं?
- आप अपने विशिष्ट प्रोजेक्ट के नाम से व्हाट्सएप (WhatsApp) या फेसबुक (Facebook) पर समूहों को खोज सकते हैं (जैसे “Sushma Grande NXT Buyers Group”)।
- यदि आपके प्रोजेक्ट का कोई मौजूदा समूह नहीं है, तो आप खुद एक समूह शुरू कर सकते हैं, जिससे उसी स्थिति में फंसे अन्य खरीदार आपसे जल्दी जुड़ जाएंगे।
क्या समूह में शिकायत करने के लिए कोई पोर्टल है?
स्रोतों के अनुसार, विशेष रूप से “समूह शिकायत” (Group Complaint) के लिए कोई अलग से समर्पित पोर्टल नहीं है, लेकिन आप मौजूदा कानूनी और प्रशासनिक पोर्टलों का उपयोग सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज करने के लिए कर सकते हैं।
समूह में कार्रवाई करने के लिए आप निम्नलिखित माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:
- समूह बनाने या खोजने के लिए सोशल मीडिया: पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने से पहले, आपको अपने प्रोजेक्ट (जैसे सुषमा वैलेंसिया या ग्रांडे एनएक्सटी) के अन्य खरीदारों को इकट्ठा करना होगा। इसके लिए आप Facebook या WhatsApp पर अपने प्रोजेक्ट के नाम से बने समूहों को खोज सकते हैं (उदाहरण: “Sushma Grande NXT Buyers Group”)। यदि कोई समूह नहीं है, तो आप खुद एक बनाकर अन्य खरीदारों को जोड़ सकते हैं।
- पंजाब रेरा पोर्टल (rera.punjab.gov.in): एक बार समूह बन जाने के बाद, आप रेरा अधिनियम की धारा 31 के तहत इस पोर्टल पर सामूहिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल ऑनलाइन है और सामूहिक शिकायतों के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है।
- कंज्यूमर कोर्ट ई-फाइलिंग (edaakhil.nic.in): उपभोक्ता अदालत में सामूहिक रूप से मामला दर्ज करने के लिए आप इस पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत, समान समस्या वाले खरीदार मिलकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल (pgrs.punjab.gov.in): प्रशासनिक हस्तक्षेप के लिए पूरा समूह मिलकर इस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है, जो अक्सर कोर्ट की तुलना में तेज़ प्रतिक्रिया देता है।
समूह में शिकायत करने के मुख्य लाभ:
- लागत में कमी: सामूहिक शिकायत करने से व्यक्तिगत कानूनी खर्च 80% तक कम हो जाते हैं।
- अधिक प्रभाव: एकल शिकायत की तुलना में सामूहिक शिकायत का कानूनी वजन अधिक होता है और यह बिल्डर पर समझौता करने के लिए बहुत दबाव डालता है।
- मीडिया का ध्यान: खरीदारों का बड़ा समूह मीडिया और प्रशासन का ध्यान अधिक आसानी से आकर्षित करता है।
आप इनमें से किसी भी पोर्टल पर अपनी सामूहिक शिकायत शुरू कर सकते हैं, बशर्ते आपके पास सभी आवश्यक दस्तावेज (जैसे आवंटन पत्र और भुगतान रसीदें) तैयार हों।
क्या बिल्डर की संपत्ति कुर्क हो सकती है?
हाँ, बिल्डर की संपत्ति बिल्कुल कुर्क (attach) की जा सकती है और सुषमा बिल्डटेक के मामले में अदालतों ने पहले भी ऐसे सख्त आदेश दिए हैं,।
स्रोतों के अनुसार, संपत्ति कुर्की से जुड़ी प्रमुख कार्रवाइयां नीचे दी गई हैं:
- पूरे प्रोजेक्ट की कुर्की: अक्टूबर 2025 में, उपभोक्ता आयोग ने आदेशों का पालन न करने पर सुषमा बिल्डटेक के जीरकपुर के गाजीपुर स्थित पूरे प्रोजेक्ट को कुर्क करने का आदेश दिया था।
- बैंक खातों को फ्रीज करना: मार्च 2026 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बिल्डर के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था,। ये खाते तब डी-फ्रीज किए गए जब बिल्डर के वकील ने 4 महीने के भीतर खरीदारों को 50% राशि वापस करने का हलफनामा (undertaking) दिया।
- एग्जीक्यूशन पिटीशन (Execution Petition): यदि आपके पास कोर्ट या रेरा (RERA) का आदेश है और बिल्डर उसे नहीं मान रहा है, तो आप निष्पादन याचिका (Execution Petition) दायर कर सकते हैं। इसके तहत अदालत बिल्डर की प्रोजेक्ट संपत्तियों को कुर्क करने, बैंक खाते सील करने और निदेशकों के खिलाफ वारंट जारी करने की शक्ति रखती है।
- प्रोजेक्ट संपत्तियों की कुर्की: कोर्ट न केवल बैंक खातों बल्कि बिल्डर की प्रोजेक्ट एसेट्स (जैसे खाली जमीन या अनबिके फ्लैट) को भी कुर्क कर सकता है ताकि खरीदारों के रिफंड की वसूली की जा सके।
यह प्रक्रिया उन खरीदारों के लिए सबसे प्रभावी है जिनके पास पहले से ही कोर्ट का फैसला है, लेकिन बिल्डर भुगतान करने में देरी कर रहा है।
एग्जीक्यूशन पिटीशन कैसे दायर करें?
एग्जीक्यूशन पिटीशन (Execution Petition) तब दायर की जाती है जब आपके पास कोर्ट या रेरा (RERA) का आदेश हो, लेकिन बिल्डर (जैसे सुषमा बिल्डटेक) उस आदेश का पालन न कर रहा हो। इसे दायर करने की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:
1. कहाँ दायर करें?
- एग्जीक्यूशन पिटीशन उसी अदालत या फोरम में दायर की जानी चाहिए जिसने मूल आदेश पारित किया था। उदाहरण के लिए, यदि आदेश जिला उपभोक्ता फोरम ने दिया है, तो पिटीशन वहीं जाएगी।
2. कोर्ट की शक्तियाँ (इस पिटीशन के तहत क्या हो सकता है?)
जब आप यह पिटीशन दायर करते हैं, तो अदालत के पास आदेश मनवाने के लिए कई सख्त शक्तियाँ होती हैं:
- बैंक खाते और संपत्ति की कुर्की: कोर्ट बिल्डर के बैंक खातों को फ्रीज कर सकता है और उसकी संपत्तियों (जैसे अनबिके फ्लैट या प्रोजेक्ट की जमीन) को कुर्क करने का आदेश दे सकता है।
- गिरफ्तारी वारंट: कोर्ट बिल्डर के निदेशकों के खिलाफ जमानती (Bailable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) वारंट जारी कर सकता है।
- अदालत की अवमानना (Contempt of Court): आदेश की अनदेखी करने पर बिल्डर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।
3. वास्तविक उदाहरण (सुषमा बिल्डटेक के मामले)
- मार्च 2026: खरीदारों द्वारा एग्जीक्यूशन पिटीशन दायर करने के बाद ही पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सुषमा बिल्डटेक के बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया था।
- मार्च 2026: चंडीगढ़ उपभोक्ता फोरम ने आदेश का पालन न करने पर बिल्डर के दो निदेशकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए थे।
4. समय और लागत
- लागत: यदि आप उच्च न्यायालय में एग्जीक्यूशन पिटीशन दायर करते हैं, तो वकील की फीस और कानूनी खर्च ₹10,000 से ₹30,000 के बीच हो सकता है।
- समय: इस प्रक्रिया में आमतौर पर 3 से 12 महीने का समय लग सकता है।
सुझाव: चूंकि यह एक तकनीकी कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए इसे किसी विशेषज्ञ वकील के माध्यम से ही करना चाहिए। आप कोर्ट से यह भी मांग कर सकते हैं कि इस कानूनी कार्यवाही में होने वाला खर्च (Litigation Cost) भी बिल्डर से ही वसूल किया जाए
वकील का संपर्क कैसे ढूँढें?
सुषमा बिल्डटेक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सही वकील ढूँढने के लिए आप स्रोतों के आधार पर निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं:
- होमबॉयर्स ग्रुप (Homebuyers’ Group) से संपर्क करें: यह वकील ढूँढने का सबसे प्रभावी तरीका है। आप अपने प्रोजेक्ट (जैसे सुषमा वैलेंसिया, ग्रांडे एनएक्सटी, या होमवर्क) के फेसबुक या व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल हों। वहां आपको उन वकीलों के संपर्क आसानी से मिल जाएंगे जो पहले से ही अन्य खरीदारों के लिए सुषमा बिल्डटेक के खिलाफ केस लड़ रहे हैं और जीत रहे हैं। समूह में शिकायत करने से वकीलों की फीस भी 80% तक कम हो सकती है।
- रेरा-पंजीकृत वकील (RERA-Registered Advocate): सूत्रों के अनुसार, आपको चंडीगढ़ या मोहाली में स्थित किसी ‘रेरा-पंजीकृत वकील’ से सलाह लेनी चाहिए। आप पंजाब रेरा की आधिकारिक वेबसाइट (rera.punjab.gov.in) पर जाकर भी पंजीकृत पेशेवरों की जानकारी देख सकते हैं।
- सफल केसों के रिकॉर्ड देखें: आप उन वकीलों का पता लगा सकते हैं जिन्होंने हाल ही में सुषमा बिल्डटेक के खिलाफ बड़े फैसले जीते हैं। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2026 में ₹79.9 लाख का रिफंड और जून 2026 में ₹10.05 लाख का रिफंड दिलाने वाले वकीलों की जानकारी अदालती आदेशों या मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे The Tribune या Hindustan Times) से मिल सकती है।
- ई-दाखिल पोर्टल (e-Daakhil Portal): उपभोक्ता मामलों के लिए आप edaakhil.nic.in पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं, जहाँ वकीलों और फाइलिंग की प्रक्रिया के बारे में जानकारी उपलब्ध होती है。
वकील से बात करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें:
- दस्तावेज तैयार रखें: किसी भी वकील से संपर्क करने से पहले अपना आवंटन पत्र (Allotment Letter), बायर एग्रीमेंट और भुगतान की रसीदें (Payment Receipts) तैयार रखें, क्योंकि इनके बिना कोई भी वकील आपकी मदद नहीं कर पाएगा।
- फीस का अनुमान: चंडीगढ़ के वकीलों के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजने का खर्च आमतौर पर ₹2,000 से ₹5,000 के बीच होता है।
आप बिल्डर के पंजीकृत कार्यालय (B-107, बिजनेस कॉम्प्लेक्स, एलांते मॉल, फेज-1, चंडीगढ़) पर कानूनी नोटिस भेजने के लिए किसी भी स्थानीय अनुभवी वकील की सहायता ले सकते हैं।
क्या 18% ब्याज सच में मिलता है?
हाँ, 18% ब्याज सच में मिलता है और अदालतों ने सुषमा बिल्डटेक (Sushma Buildtech) के मामलों में खरीदारों के पक्ष में ऐसे आदेश दिए हैं।,
स्रोतों के अनुसार, इसके मुख्य प्रमाण नीचे दिए गए हैं:
- ऐतिहासिक फैसला (अप्रैल 2026): राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (State Consumer Commission) ने ‘सुषमा चंडीगढ़ ग्रांडे’ के एक खरीदार को ₹79.90 लाख का रिफंड 18% वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था।,,
- अधिकतम ब्याज दर: 2026 तक के रिकॉर्ड के अनुसार, अदालतों द्वारा बिल्डर के खिलाफ दिया गया यह अब तक का सबसे अधिक (Max) ब्याज है।
- अन्य मामलों में ब्याज दर: हालांकि 18% ब्याज दिया गया है, लेकिन कुछ अन्य मामलों में अदालतों ने 9% वार्षिक ब्याज के साथ रिफंड के आदेश भी दिए हैं।,,
- फोरम के अनुसार दरें: राज्य उपभोक्ता आयोग आमतौर पर 9% से 18% के बीच ब्याज और हर्जाना देने का आदेश देता है।
यदि आप भी रिफंड के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो पंजाब रेरा (RERA) या उपभोक्ता अदालत में अपनी शिकायत दर्ज करते समय ब्याज और मुआवजे (जैसे मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹75,000 से ₹1 लाख तक) की स्पष्ट मांग कर सकते हैं।
कोर्ट के आदेश के बाद भी पैसा न मिले तो?
यदि कोर्ट या रेरा (RERA) के आदेश के बावजूद बिल्डर पैसा वापस नहीं करता है, तो कानून आपको उस आदेश को लागू करवाने के लिए शक्तिशाली विकल्प देता है। स्रोतों के अनुसार, आपको निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
1. एग्जीक्यूशन पिटीशन (Execution Petition) दायर करें
यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यदि बिल्डर आदेश का पालन नहीं करता है, तो आप उसी अदालत या फोरम में एग्जीक्यूशन पिटीशन (निष्पादन याचिका) दायर कर सकते हैं जिसने मूल आदेश पारित किया था। इस याचिका के माध्यम से कोर्ट अपने आदेश को जबरन लागू करवाता है।
2. कोर्ट द्वारा की जाने वाली सख्त कार्रवाइयां
एग्जीक्यूशन पिटीशन के दौरान कोर्ट बिल्डर के खिलाफ कई कड़े कदम उठा सकता है, जिनके उदाहरण सुषमा बिल्डटेक के मामलों में देखे गए हैं:
- बैंक खातों को फ्रीज करना: कोर्ट बिल्डर के बैंक खातों को सील करने का आदेश दे सकता है। मार्च 2026 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने खरीदारों की याचिका पर सुषमा बिल्डटेक के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे।
- संपत्ति की कुर्की (Attachment): कोर्ट बिल्डर की अचल संपत्ति, जैसे जमीन या अनबिके फ्लैटों को कुर्क कर सकता है। अक्टूबर 2025 में, उपभोक्ता आयोग ने आदेश की अनदेखी करने पर सुषमा बिल्डटेक के पूरे जीरकपुर प्रोजेक्ट को कुर्क करने का आदेश दिया था。
- निदेशकों की गिरफ्तारी: यदि बिल्डर फिर भी भुगतान नहीं करता, तो कोर्ट निदेशकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर सकता है। मार्च 2026 में, चंडीगढ़ उपभोक्ता फोरम ने आदेश न मानने के कारण दो निदेशकों के खिलाफ ऐसे वारंट जारी किए थे,।
3. लागत और समय-सीमा
- समय: आदेश को लागू करवाने की इस प्रक्रिया में आमतौर पर 3 से 12 महीने का समय लग सकता है।
- फीस: उच्च न्यायालय में ऐसी याचिका दायर करने का कानूनी खर्च लगभग ₹10,000 से ₹30,000 के बीच हो सकता है।
सुझाव: आप कोर्ट से यह भी प्रार्थना कर सकते हैं कि इस कानूनी प्रक्रिया (Litigation) में होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बिल्डर से ही वसूल किया जाए,। जैसा कि पहले के मामलों में देखा गया है, भारी कानूनी दबाव और बैंक खाते फ्रीज होने के बाद बिल्डर अक्सर समझौता करने या भुगतान करने के लिए मजबूर हो जाता है।
सुषमा वैलेंसिया प्रोजेक्ट का क्या स्टेटस है?
अगस्त 2026 तक के आधिकारिक रिकॉर्ड और स्रोतों के अनुसार, सुषमा वैलेंसिया (Sushma Valencia) प्रोजेक्ट की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है और यह कानूनी विवादों के केंद्र में है। इस प्रोजेक्ट के स्टेटस से जुड़ी मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
- कब्जे में देरी और कानूनी शिकायतें: सुषमा वैलेंसिया उन प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल है जिनके खिलाफ कब्जे में देरी (delayed possession), ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) की कमी और अधूरे एमिनिटीज (सुविधाओं) के कारण पंजाब की विभिन्न अदालतों में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हैं।
- RERA के आदेश: पंजाब रेरा (RERA) ने सुषमा वैलेंसिया प्रोजेक्ट में देरी के लिए बिल्डर के खिलाफ पहले ही मुआवजे और ब्याज (compensation and interest) के कई आदेश पारित कर दिए हैं।
- अधूरी सुविधाएं: प्रोजेक्ट में बिजली और पानी की आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे के साथ-साथ क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, जिम और पार्क जैसी सुविधाओं के अधूरे होने की भी शिकायतें हैं।
- व्यापक कानूनी संकट का हिस्सा: यह प्रोजेक्ट उन संपत्तियों की सूची में है जिन्हें लेकर बिल्डर पर भारी दबाव है। अगस्त 2026 तक, बिल्डर के निदेशकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं और कंपनी के बैंक खाते भी फ्रीज किए गए थे।
खरीदारों के लिए वर्तमान स्थिति: यदि आप इस प्रोजेक्ट के खरीदार हैं, तो आप रेरा अधिनियम की धारा 18 के तहत पूर्ण रिफंड या धारा 31 के तहत देरी के लिए मुआवजे की मांग कर सकते हैं। चूंकि सुषमा वैलेंसिया के लिए पहले ही कई आदेश आपके पक्ष में आ चुके हैं, इसलिए आप मौजूदा कानूनी मिसाल (precedent) का लाभ उठा सकते हैं।
बिल्डर के निदेशकों पर क्या कार्रवाई हुई?
सुषमा बिल्डटेक (Sushma Buildtech) के निदेशकों के खिलाफ कोर्ट ने सख्त दंडात्मक कार्रवाई की है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
- गैर-जमानती वारंट (NBW): मार्च 2026 में, चंडीगढ़ उपभोक्ता फोरम ने कंपनी के दो निदेशकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrants) जारी किए। यह कार्रवाई अदालत के पुराने आदेशों का पालन न करने के कारण की गई थी।
- जमानती वारंट की विफलता: इससे पहले निदेशकों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए गए थे, लेकिन वे निष्पादित नहीं हो सके क्योंकि निदेशक कथित तौर पर “शहर से बाहर” (out of station) थे। इसके बाद ही कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जैसा कड़ा कदम उठाया, जिसकी वापसी की तारीख (returnable date) 7 अप्रैल, 2026 तय की गई थी।
- अदालत की सख्त शक्तियाँ: निष्पादन याचिका (Execution Petition) के तहत, अदालत के पास न केवल वारंट जारी करने की शक्ति है, बल्कि वह आदेश का पालन न करने पर निदेशकों को गिरफ्तार करने और उनकी व्यक्तिगत या कंपनी की संपत्ति कुर्क करने के आदेश भी दे सकती है।
- वित्तीय दबाव: निदेशकों पर कानूनी दबाव तब और बढ़ गया जब पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कंपनी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। इसके बाद ही बिल्डर के वकील ने 4 महीने के भीतर खरीदारों को 50% राशि वापस करने का हलफनामा (undertaking) दिया।
अगस्त 2026 तक की रिपोर्टों के अनुसार, ये कार्रवाइयां दर्शाती हैं कि बिल्डर के शीर्ष प्रबंधन को अब कानूनी आदेशों की अनदेखी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
क्या दूसरे राज्यों के लोग भी शिकायत कर सकते हैं?
हाँ, दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग भी सुषमा बिल्डटेक के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। कानूनी क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) आमतौर पर इस बात पर निर्भर करता है कि प्रोजेक्ट कहाँ स्थित है, न कि इस पर कि खरीदार कहाँ रहता है,।
स्रोतों के आधार पर दूसरे राज्यों के खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:
- प्रोजेक्ट की लोकेशन मुख्य है: चूंकि सुषमा बिल्डटेक के विवादित प्रोजेक्ट (जैसे वैलेंसिया, ग्रांडे एनएक्सटी, और होमवर्क) जीरकपुर, मोहाली और चंडीगढ़ में स्थित हैं, इसलिए इन मामलों की सुनवाई पंजाब के संबंधित कानूनी मंचों पर होती है,। यदि आपने इन प्रोजेक्ट्स में निवेश किया है, तो आप देश के किसी भी कोने से कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।
- ऑनलाइन शिकायत की सुविधा: पंजाब रेरा (RERA) की वेबसाइट (rera.punjab.gov.in) पर शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है,। इसके माध्यम से कोई भी पीड़ित खरीदार (aggrieved homebuyer) कहीं से भी धारा 31 के तहत शिकायत दर्ज कर सकता है और रिफंड या ब्याज की मांग कर सकता है,।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC): यदि आपके द्वारा भुगतान की गई राशि 2 करोड़ रुपये से अधिक है, तो आप नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में शिकायत दर्ज कर सकते हैं,। यह संस्था पूरे देश के बड़े मामलों की सुनवाई करती है।
- मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल: बाहरी राज्यों के लोग भी पंजाब के मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल (pgrs.punjab.gov.in) पर प्रशासनिक हस्तक्षेप के लिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं,।
सलाह: दूसरे राज्य में होने के कारण आपके लिए सामूहिक शिकायत (Group Filing) में शामिल होना सबसे बेहतर रहेगा। इससे आपको बार-बार चंडीगढ़ या पंजाब आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वकील के माध्यम से आपका केस प्रभावी ढंग से लड़ा जा सकेगा। शिकायत दर्ज करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपके पास आवंटन पत्र और भुगतान की सभी रसीदें डिजिटल रूप में सुरक्षित हैं।
